आयुर्वेद में बवासीर को "अर्श" कहते हैं
आयुर्वेद में बवासीर को "अर्श" कहा गया है। सुश्रुत संहिता में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।
आयुर्वेदिक दृष्टि से बवासीर के कारण:
- वात, पित्त और कफ का असंतुलन
- मंदाग्नि (पाचन अग्नि की कमजोरी)
- कब्ज
- अधिक बैठना
आयुर्वेदिक उपचार विधियाँ:
1. औषधि चिकित्सा (Herbal Medicine)
अर्शोघ्नी वटी, सुरण मोदक, अभयारिष्ट आदि।
2. क्षारसूत्र चिकित्सा
धागे से बवासीर के मस्सों को बांधकर समाप्त करना। यह बहुत प्रभावी है।
3. Agnikarma (अग्निकर्म)
गर्म wire से बवासीर के mass को जलाना।
4. Leech Therapy (जलौकावचारण)
रक्त शुद्धि के लिए।
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